झारखण्ड की सियासत का केन्द्र बिंदु बना संथाल, गोड्डा सीट को लेकर महागठबंधन में बढ़ी किचकिच

झारखण्ड की सियासत का केन्द्र बिंदु बना संथाल, गोड्डा सीट को लेकर महागठबंधन में बढ़ी किचकिच

AJAYA BHARAT DESK: संथाल की राजनीति के केंद्रबिंदु बने जामताड़ा में राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। संथाल में सीट बंटवारे पर बिखरा विपक्ष की मतभिन्नता खुलकर तब सामने आ गई, जब कांग्रेस और जेवीएम के नेता परस्पर एक-दूसरे दलों पर कटाक्ष करते हुए गोड्डा सीट पर अपनी-अपनी दावेदारी कर रहे हैं।

जामताड़ा में गोड्डा सीट को लेकर कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी अपने पिता फुरकान अंसारी के लिए सुरक्षित रखने की मांग गठबंधन के वरीय नेताओं से की है। साथ ही फुरकान अंसारी ने गोड्डा सीट पर अपनी दावेदारी को जायज बताते हुए प्रदीप यादव के दावेदारी को बचकाना मांग क़रार दिया है। 
बहरहाल, राजनीतिक का ककहरा सीख रहे जेवीएम नेता प्रदीप यादव की दावेदारी को उचित ठहराते हुए कांग्रेस को गोड्डा सीट से अलग रहने की नसीहत दे रहे हैं। गोड्डा सीट को लेकर संथाल में मची राजनीतिक सरगर्मी ने विपक्षी एकता के दावे की पोल खोल दी है। 

अगर संथाल परगना में गोड्डा सीट को लेकर यूं ही जिच कायम रहा तो इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा। हालांकि सीट बंटवारे में विपक्षी दलों के बीच कायम मतभेद पर भाजपा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन जिस तरह विपक्षी एकता की नींव संथाल में सरक रही है, उससे जेवीएम और कांग्रेस के तल्ख-तेवर एक दूसरे के प्रति बढ़ते जाएंगे। 

दुमका सीट से शिबू सोरेन के छोटे पुत्र बसंत सोरेन को बतौर जेएमएम प्रत्याशी की चर्चा ने संथाल के लोगों में एक तरफ जहां नया संचार का प्रेषण किया है, वहीं पार्टी के तौर पर देखा जाए तो शिबू सोरेन की राजनीतिक स्थिरता को लेकर सत्तारूढ़ दलों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। 

हालांकि दुमका सीट जेएमएम के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है, जो इस बात को भी बल दे रहा है कि अगर दुमका लोकसभा सीट जेएमएम जीतती है तो इसे जेएमएम की जीत मानी जायेगी। अगर हारती है तो शिबू सोरेन की पकड़ ढीली समझी जाएगी। 

जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन लगातार अस्वस्थता के दौर से गुजर रहे हैं। यही कारण है कि अब पार्टी के हितों को देखते हुए सभी निर्णयों को जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन द्वारा लिया जा रहा है। उन्ही निर्णयों में एक प्रमुख निर्णय है  कि अपने अनुज बसंत सोरेन को दुमका लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाकर पुनः दुमका सीट पर कब्जा जमाना।

दूसरी तरफ जेवीएम और कांग्रेस के बीच गोड्डा सीट को लेकर जारी उठापटक पर जेएमएम की चुप्पी ने दोनों पार्टियों को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि गोड्डा सीट पर अपने स्टैंड से बैक आना पार्टी को बैकफुट पर ला खड़ा करेगी, जिसका सीधा असर आसन्न विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। 

दुमका लोकसभा को लेकर सबसे गौरतलब बात ये है कि बाबूलाल मरांडी को छोड़ अब तक किसी भाजपा प्रत्याशी ने दुमका सीट पर शिबू सोरेन के खिलाफ फतह हासिल किया है  इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा द्वारा एक दिवसीय दुमका दौरे का कार्यक्रम प्रस्तावित है। 

बहरहाल, प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर तिथि की घोषणा नहीं की गई है लेकिन नरेंद्र मोदी का दुमका सीट के लिए दौरा करना संथाल के लोगों के मिजाज को बदल देगा, जो जेएमएम को पटखनी देने के लिए अंतिम दांव होगा। 

अजेय भारत के लिए जामताड़ा से रामप्रवेश की रिपोर्ट